बिहार की शिक्षा व्यवस्था और रोजगार पर जन सुराज विचार मंच की संगोष्ठी: गहन विचार-विमर्श का केंद्र

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मोतिहारी। जन सुराज विचार मंच के बैनर तले रविवार को बलुआ स्थित जीनियस पब्लिक स्कूल में बिहार में शिक्षा व्यवस्था और रोजगार की समस्याओं पर एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस संगोष्ठी में जिले भर के बुद्धिजीवियों, शिक्षाविदों, अधिवक्ताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं और पत्रकारों ने भाग लिया। संगोष्ठी की अध्यक्षता वरिष्ठ पत्रकार और विचार मंच के जिला प्रमुख विनोद कुमार सिंह ने की।

शिक्षा और रोजगार: बिहार की ज्वलंत समस्याएं

बैठक में बिहार की शिक्षा व्यवस्था और उससे जुड़ी समस्याओं पर गहन चर्चा हुई। विचार मंच के प्रमुख विनोद कुमार सिंह ने अपने संबोधन में बिहार की शिक्षा व्यवस्था को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि जब तक शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार नहीं किया जाएगा, बिहार के युवाओं को बेरोजगारी की समस्या से मुक्ति नहीं मिल सकेगी। उन्होंने शिक्षा की गुणवत्ता पर जोर देते हुए कहा कि आज शिक्षा का मूल उद्देश्य समाप्त होता दिख रहा है। सरकारी विद्यालयों की बदहाल स्थिति, शिक्षकों की कमी और बुनियादी ढांचे की खामियां बच्चों के भविष्य को अंधकारमय बना रही हैं।

प्रशांत किशोर के विचारों का समर्थन

अधिवक्ता प्रत्युष कुमार सिंह ने अपने संबोधन में जन सुराज अभियान के संस्थापक प्रशांत किशोर के विचारों को साझा किया। उन्होंने कहा कि प्रशांत किशोर की सोच है कि बिहार के हर जिले में नेतरहाट जैसे उच्चस्तरीय विद्यालयों की स्थापना होनी चाहिए, ताकि बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे अपने बच्चों को शिक्षित करने के प्रति जागरूक हों, क्योंकि शिक्षित समाज ही किसी भी राज्य के विकास का आधार होता है।

बिहार की शिक्षा व्यवस्था पर प्रहार

संगोष्ठी के दौरान वक्ताओं ने बिहार की शिक्षा व्यवस्था पर कड़ा प्रहार किया। उनका मानना था कि सरकारी विद्यालयों की स्थिति सुधारने के लिए ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है। शिक्षा के क्षेत्र में निजीकरण के बढ़ते प्रभाव और शिक्षा को व्यापार बनाने की प्रवृत्ति पर भी चिंता व्यक्त की गई। वक्ताओं ने सरकार से मांग की कि शिक्षकों की समय पर नियुक्ति, विद्यालयों में बुनियादी सुविधाएं और शिक्षण गुणवत्ता में सुधार सुनिश्चित किया जाए।

समाज सुधार की दिशा में शिक्षा का महत्व

संगोष्ठी में उपस्थित समाजसेवी और बुद्धिजीवियों ने कहा कि शिक्षा ही समाज सुधार का सबसे प्रभावी माध्यम है। पूर्व मुखिया अजय कुमार ने कहा कि जब तक समाज के हर वर्ग के बच्चे शिक्षित नहीं होंगे, तब तक समाज में समानता और विकास का सपना अधूरा रहेगा। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि सरकार को शिक्षकों का नियमित प्रशिक्षण सुनिश्चित करना चाहिए, ताकि वे विद्यार्थियों को बेहतर तरीके से शिक्षित कर सकें।

रोजगार की समस्या पर चर्चा

बैठक में रोजगार की समस्या पर भी चर्चा हुई। वक्ताओं ने कहा कि बिहार के लाखों युवा शिक्षा प्राप्त करने के बावजूद बेरोजगार हैं। इसका मुख्य कारण यह है कि शिक्षा और रोजगार के बीच कोई ठोस कड़ी नहीं है। वक्ताओं ने सुझाव दिया कि राज्य में स्वरोजगार को बढ़ावा देने और युवाओं को व्यावसायिक शिक्षा देने के लिए विशेष योजनाएं शुरू की जानी चाहिए।

संगोष्ठी में शामिल प्रमुख लोग

इस संगोष्ठी में वरिष्ठ पत्रकार राजन दत्त द्विवेदी, अधिवक्ता दिनेश्वर प्रसाद, समाजसेवी शिव कुमार (पूर्व मेयर प्रत्याशी), पत्रकार अरुण कुमार, अभय श्रीवास्तव, अभय तिवारी, आनंद प्रकाश और मनोज कुमार सहित जिले के कई गणमान्य लोग उपस्थित थे। सभी ने अपने विचार रखते हुए बिहार के शिक्षा और रोजगार क्षेत्र में सुधार की आवश्यकता पर बल दिया।

निष्कर्ष

बैठक के अंत में यह सहमति बनी कि बिहार की शिक्षा व्यवस्था को सुधारने के लिए समाज के हर वर्ग को एकजुट होकर प्रयास करना होगा। शिक्षा ही बेरोजगारी और सामाजिक असमानता जैसी समस्याओं का समाधान है। विचार मंच के सदस्यों ने इस बात पर भी जोर दिया कि ऐसी बैठकों के माध्यम से जन जागरूकता फैलाना और सरकार पर सकारात्मक दबाव बनाना आवश्यक है।

संगोष्ठी में रखे गए विचार और सुझाव बिहार के विकास के लिए मील का पत्थर साबित हो सकते हैं।