अफीम के नशा से भी ज्यादा खतरनाक है सोशल मीडिया

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मोतिहारी शनिवार, 14 दिसंबर को स्थानीय नगर भवन में वकालत डॉट कॉम और इमैनुएल स्कूल के संयुक्त तत्वावधान में एक सेमिनार का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य बच्चों को साइबर क्राइम और सोशल मीडिया के खतरों के प्रति जागरूक करना था। कार्यक्रम की शुरुआत महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय के आचार्य प्रो. विकास पारिख, साइबर डीएसपी वसीम फिरोज, प्रोबेशनर डीएसपी मधु कुमारी, वरिष्ठ पत्रकार शशिशेखर, इमैनुएल स्कूल के निदेशक  श्रवण मोथे, और वकालत डॉट कॉम के ज्ञानेश्वर गौतम द्वारा दीप प्रज्वलन के साथ हुई। 

प्रमुख वक्ताओं के विचार:

प्रो. विकास पारिख ने अपने संबोधन में सोशल मीडिया को “अफीम से भी ज्यादा खतरनाक” बताया। उन्होंने बच्चों को सोशल मीडिया के दुष्प्रभावों से बचने के लिए महत्वपूर्ण सुझाव दिए और साइबर क्राइम से बचाव के तरीकों पर प्रकाश डाला।

वरिष्ठ पत्रकार शशिशेखर ने अपने अनुभवों और उदाहरणों के माध्यम से बच्चों को जागरूक किया।

साइबर डीएसपी वसीम फिरोज ने बच्चों के सवालों के उत्तर देकर उनकी उत्सुकता को शांत किया और साइबर सुरक्षा से संबंधित अहम जानकारी साझा की।

डीएसपी प्रोबेशनर मधु कुमारी ने पॉक्सो एक्ट की जानकारी दी और बच्चों को इसके प्रावधानों के प्रति संवेदनशील बनाया।

ज्ञानेश्वर गौतम (वकालत डॉट कॉम) ने मोबाइल और सोशल मीडिया को बच्चों की प्रगति में बाधक बताया। उन्होंने 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के सोशल मीडिया अकाउंट फ्रीज करने की मांग भी उठाई।

इंटरेक्शन और गतिविधियां:

बच्चों ने सेमिनार में सक्रिय भागीदारी की। इंटरेक्शन सेशन में बच्चों ने उत्साहपूर्वक सवाल पूछे और विशेषज्ञों से मार्गदर्शन प्राप्त किया। सेमिनार के अंत में बच्चों से इस विषय पर निबंध लिखने को कहा गया। श्रेष्ठ 10 निबंध लिखने वाले बच्चों को सम्मानित करने की घोषणा की गई।

समापन संदेश:

इमैनुएल स्कूल के निदेशक  श्रवण मोथे ने अपने समापन भाषण में मंच पर उपस्थित विशेषज्ञों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि ये विशेषज्ञ बच्चों में अपार संभावनाएं देखते हैं और उन्हें सही दिशा में मार्गदर्शन प्रदान करने के लिए अपना समय साझा कर रहे हैं।

निष्कर्ष:

यह सेमिनार न केवल साइबर क्राइम और सोशल मीडिया के खतरों पर जागरूकता फैलाने में सफल रहा, बल्कि बच्चों के बीच डिजिटल सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने का भी एक प्रभावी माध्यम साबित हुआ।