मोतिहारी लक्ष्मी नारायण दूबे महाविद्यालय ( L. N. D) के परिसर में लगभग 2 बजे एक सांप की अचानक उपस्थिति से छात्रों, छात्राओं और कर्मचारियों में क्षणिक अफरा-तफरी मच गई। संस्थापक स्व. लक्ष्मी नारायण दूबे जी की प्रतिमा के समीप एक सांप घूमता हुआ दिखाई दिया। इसके बाद, जंतु विज्ञान के कुछ छात्र शीघ्रता से अपने प्राध्यापक और सर्प-विशेषज्ञ डॉ. नीरज कुमार को सांप (snake)के निकलने की सूचना दी।
डॉ . नीरज कुमार ने शीघ्रता से कार्य करते हुए घटनास्थल पर पहुंचकर सांप की पहचान की और सभी को सूचित किया कि यह एक हानिरहित धामिन सांप है, जिससे किसी को भी भयभीत होने की आवश्यकता नहीं है। तत्पश्चात, उन्होंने सांप को अपने हाथों से पकड़कर महाविद्यालय परिसर में उपस्थित शिक्षकों, कर्मचारियों, छात्रों और छात्राओं को धामिन और अन्य सांपों के बारे में विस्तृत जानकारी प्रदान की, जिसमें इसके अंग्रेजी नाम इंडियन रैट स्नेक और वैज्ञानिक नाम ट्यास म्युकोसा शामिल था।
यह कल्यूब्रिडे परिवार का एक प्रमुख सदस्य है। धामिन एक सामान्य सांप है जो भारत और दक्षिण-पूर्व एशिया के विभिन्न देशों में व्यापक रूप से वितरित है। इसकी अधिकतम लंबाई 138 इंच या अधिक हो सकती है। यह छोटे जानवरों जैसे चूहे ( Rat) , मेढक(Frog) , छिपकली(Lizard) पक्षी (Bird) और अन्य सांपों (Other snake) का शिकार करके अपना भोजन प्राप्त करता है। धामिन एक अत्यंत चपलता, सतर्कता और गतिशीलता वाला सांप है जो दिन में सक्रिय होता है और रात में भी शिकार करता है। यह पेड़ों पर चढ़ने में भी सक्षम है।
मादा धामिन प्रजनन काल में (मार्च से सितंबर) एक क्लच में 8 से 22 अंडे देती है। स्नातक जंतु विज्ञान के छात्र विंकल कुमार यादव ने डॉ. नीरज से जिज्ञासावश पूछा कि क्या धामिन की पूंछ में विष होता है? इसका जवाब देते हुए सर्प विशेषज्ञ डॉ. नीरज ने बताया कि यह एक अंधविश्वास है।
आम तौर पर, विषैले सर्पों में विष ग्रंथियों का एक जोड़ा पाया जाता है, जिनमें विष का उत्पादन होता है और विष वेनम डक्ट के माध्यम से विष दंत (फेंग) द्वारा मनुष्य या अन्य शिकार के शरीर में पहुँचाया जाता है, जिसके परिणामस्वरूप मृत्यु हो सकती है। हालांकि, धामिन एक विषहीन सर्प है, जिसमें विष ग्रंथि, विष दंत नहीं होते और इसकी पूंछ में किसी भी प्रकार का विष नहीं पाया जाता।
इससे संबंधित अन्य छात्रों के प्रश्नों का भी डॉ. नीरज कुमार ने समाधान किया और उनकी जिज्ञासा को शांत किया। इसके पश्चात, उन्होंने महाविद्यालय के पिछले भाग में स्थित घने झाड़ियों में सुरक्षित रूप से सांप को स्वतंत्र कर दिया, जो तत्काल झाड़ियों में अदृश्य हो गया।










