गांधी जी के सपनों को सहकार करेगी खादी ग्राम उद्योग

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महात्मा गांधी का पूरा नाम मोहनदास करमचंद गांधी था। करमचंद उनके पिता का नाम था। महात्मा गांधी के इरादे बहुत ही मजबूत हुआ करते थे। उन्होने अपने जीवन में जो भी संकल्प लिया उसे मरते दम तक पूरा किया। सन् 1888 में महात्मा गांधी जी लंदन में सूट में दिखे फिर 33 साल बाद सन् 1921 में मदुरई में धोती में और इसी के चलते हुए गांधी जी नें अपने कपडो के जरिये देषभर में सत्याग्रह आन्दोलन की नींव रखी।

31 अगस्त 1920 में महात्मा गांधी जी ने खादी को अपनाया

खेड़ा नामक स्थान पर किसानो के सत्याग्रह में महात्मा गांधी जी ने खादी पहनने की शपथ ली। 1920 में अंग्रेजी हुकूमत किसानें को कपास की खेती के लिए मजबूर करती थी जिससे वो कपास विदेश पहुंचाया जा सके। महात्मा गांधी जी उसी वक्त 31 अगस्त 1920 को शपथ लेते हुए कहा- ‘आज के बाद से मैं जिंदगी भर हाथ से बनाए हुए कपड़ों का ही इस्तेमाल करूंगा।’

महात्मा गांधी के सपनों को पूरा करने के लिए फिर से शुरू हुआ ग्रामीण खादी उद्योग

केंद्रीय खादी ग्रामोद्योग आयोग ने खादी के मौजूदा उत्पादन और विपणन बढ़ाकर दोगुना करने का लक्ष्य निर्धारित किया है. बिहार से विलुप्त होती खादी ग्राम उद्योग को फिर से शुरू करना चाहती है बिहार सरकार इसमें पूर्वी चंपारण जिले के पाँच एन जी ओ  को यह मौका प्राप्त हुआ है कि यह खादी ग्राम उद्योग को फिर से शुरू किया जा सके जिससे गांधी जी के उसके सपनों को सहकार करने के साथ-साथ गांव के बेरोजगार युवा और महिलाओं को रोजगार प्राप्त हो सके जिससे ग्रामीण स्तर पर लोगों की आय में वृद्धि होगी जिससे उनका परिवार अच्छे ढंग से चल सके आज सारे लोग अपनी बेरोजगारी की तंज झेल रहे हैं और कोई ना कोई काम नहीं मिलने के कारण अपना गुजर बसर बहुत ही मुश्किल में कर रहे हैं इसी समस्या को समाधान को लेकर बिहार सरकार ने सोचा है कि कुटीर उद्योग के माध्यम से गो के द्वारा गांव में खादी ग्रामोद्योग की शुरुआत की जाए जिससे महिलाओं की आर्थिक स्थिति में सुधार आए और लोग भी खड़ी के कपड़ों को पहन करके गर्मी से निजात पा सके आपको बताते चले की खाड़ी के वस्त्र केवल गर्मी के दोनों ही में ही नहीं कभी भी किसी भी समय में पहना जा सकता है और इसे काफी आरामदायक महसूस होता है

इसी संदर्भ में आपको बताते चले कि पूर्व पूर्वी चंपारण जिले के निवासी रंजीत कुमार जो तुरकौलिया प्रखंड अंतर्गत जयसिंहपुर के निवासी है उनके एनजीओ के माध्यम से मोतिहारी में खादी ग्राम उद्योग को सुचारू रूप से चलाकर फिर से गांधी जी के सपनों को सहकार करने का अवसर प्रदान किया गया है जिससे वह तुरकौलिया ही नहीं आसपास के प्रखंड के क्षेत्र को लोगों को भी इस कार्य के लिए प्रोत्साहित करते हुए अपने जिले का नाम देश स्तर पर गौरवशाली करें

खादी का वार्षिक उत्पादन रु. तक पहुंच गया है। 350 करोड़, जिससे 13.87 लाख ग्रामीण लोगों को रोजगार मिला। खादी क्षेत्र द्वारा देश की अर्थव्यवस्था, विशेषकर ग्रामीण रोजगार के क्षेत्र में दिए जा रहे उपयोगी योगदान को देखते हुए, भारत सरकार ने इसके उत्पाद पर सब्सिडी देकर भी इसकी निरंतरता सुनिश्चित करना उचित समझा।