नहर की जमीन पर रसूखदारों ने बनाया मकान, बांउड्री, पार्किंग और कॉम्प्लेक्स

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मोतिहारी। एक तरफ सरकारी स्तर पर हर खेत में पानी उपलब्ध कराने के लिए कई महत्वपूर्ण योजना चलाए जा रही है। लेकिन नगर औरप्रखंड क्षेत्र के कई कोशी नहर के किनारे अवैध तरीके से कब्जा कर घर बनाए जाने से नहर का अस्तित्व खतरे में पड़ गया है। फसल की सिचाई के लिए रघुनाथपुर  के 28 और 29 नंबर वार्ड  कुछ लोगों द्वारा  अतिक्रमण कर अवैध तरीके से घर बना लिया गया हैं । विभागीय उदासीनता का शिकार बना  नहर में एक तरफ जहां समय पर किसानों को खेतों में पानी उपलब्ध नहीं होता है तो दूसरी नहर के दोनों पाटों का अवैध कब्जा कर घर बनाए जा रहे हैं।   पहले तो ट्रेक्टर चालक द्वारा नहर के बीच जमीन का मिट्टी काट कर उगाही किये जाने से बर्बाद हो चुका है। दूसरी तरफ बीते दिनों से नहर पर छतरी व घर चढ़ाकर कब्जा जमाये जाने से आपसी तनाव बढ़ गया है। नहर के किनारे निजी जमीन मालिक व अवैध कब्जाधारी के बीच बढ़ते विवाद पर विभागीय व प्रशासनिक स्तर पर समय रहते कार्रवाई नहीं होने पर बड़ी अनहोनी से इंकार नहीं किया जा सकता हैं

नहर  की जमीन पर अवैध कब्जा, अधिकारी मौन

जिले के रघुनाथपुर मे नहर किनारे की सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा करने की होड़ मची हुई है। विभाग की जमीन पर अतिक्रमण कर लोग पक्का मकान बना रहे हैं मगर राजस्व और नहर विभाग के अधिकारी आंख मुंदकर बैठे हुए हैं। इसकी वजह से इस मार्ग में विभागीय अधिकारियों के आंख के सामने अतिक्रमण हो रहा और वे कुछ नहीं कर रहे हैं। राजस्व विभाग के अधिकारियों के पास कार्रवाई के लिए समय नहीं है।

नगर कि स्थित नहर किनारे की जमीन पर वहां रहने वाले लोगों ने अवैध कब्जा कर लिया है। इसके अलावा नहर से लगी हुई नहर विभाग की जमीन को भी लोगों ने नहीं छोड़ा है। इस नहर के दोनों ओर सडक बनाई गयी हैं। इस सड़क पर लोगों की नजर लग गई है। ऐसे लोगों के हौसले बुलंद हो गए हैं। अब नहर की जमीन पर कब्जा कर उसमें पक्का मकान बना रहे हैं। नहर विभाग के अधिकारी सब देख रहे हैं। फिर भी कार्रवाई नहीं कर रहे हैं। वे कार्रवाई के लिए राजस्व विभाग के अधिकारियों की मुंह ताक रहे हैं। इन लोगों के हौसले इतने बुलंद है कि करोडों की जमीन पर अवैध कब्जा कर बैठे है। यही नही यह सब नहर विभाग के कुुछ उच्च अधिकारी की मिलीभगत से हो रहा है। इस जमीन पर कब्जा की लोगों ने शिकायत भी की लेकिन कोई कार्यवाही नहीं हुई। जिन लोगों ने अवैध कब्जा कर रखा है वह बहुत ही दबंग लोग किस्म के लोग है। इसकी बजह से अधिकारी भी जाने से कतराते दिखाई देते है। अब देखना होगा कि क्या इस ओर ध्यान दिया जायेगा या फिर अधिकारी मौन बैठे रहेगें ये तो आगे आने वाला वक्त ही बतायेगा।

तीन अरब की नहर भूमि पर कब्जे, आलीशान घर बने

सिंचाई विभाग की नहरों की भूमि भी अवैध कब्जों से अछूती नहीं हैं। यहां लगभग 30 हेक्टेयर से भी अधिक भूमि पर अवैध कब्जे हैं। कब्जाधारकों की संख्या 400 के आसपास हैं। इस भूमि की अनुमानित कीमत तीन अरब रुपये है।

सिंचाई विभाग की जमीनें पर अवैध आलीशान इमारतें खड़ी हो गई हैं और यहां पर लोग निवास भी कर रहे हैं। सिंचाई विभाग अपनी भूमि मुक्त कराने के लिए विभागीय कार्रवाइयों तक सीमित है। अतिक्रमण की गई भूमि में सरकारी कब्जे और ऊंची-ऊंची इमारतें हैं।

कई स्थानों पर अतिक्रमण के चलते नहरों का अस्तित्व ही खत्म हो गया है। रघुनाथपुर में सिंचाई विभाग की 17 हेक्टेयर से ज्यादा भूमि में अवैध कब्जे कर रखे गए हैं। ज्यादातर भूमि शहरी क्षेत्र में है। अवैध कब्जा करने वालों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। सरकारी बाउंड्री भी सिंचाई विभाग की भूमि में बना ली गई है।
शहर के रघुनाथपुर में रसूख वाले और सत्तारूढ़ दल से जुड़े लोग भी काबिज हैं। कब्जा की गई सिंचाई विभाग की जमीन की कीमत का आकलन निबंधन विभाग की सर्किल दरों के आधार पर किया जाए तो एक अरब 40 करोड़ रुपये की भूमि है।

यह अनुमानित कीमत रिहायशी दर पर है। व्यावसायिक दरों पर आकलन किया जाए तो यह कई गुना और बढ़ जाएगी। अतिक्रमित भूमि पर कई स्थानों पर व्यावसायिक उपयोग भी हो रहा है। यह सब विभागीय अधिकारियों की लापरवाही और धींगामुश्ती के चलते हुआ है। जमीनों पर कब्जे होते रहे और विभाग के अधिकारी आंख मूंदे बैठे रहे।