रिपब्लिक 7 भारत पत्रकार रजनीश रवि :मोतिहारी नगर निगम के नरसिंह बाबा मंदिर प्रांगण में 24 September को विहंगम योग संत समाज के शताब्दी समारंभ महोत्सव 25000 स्वर्वेद ज्ञान महायज्ञ के निमित्त स्वर्वेद कथा अमृत के प्रवर्तक पूज्य संत प्रवर विज्ञान देव जी महाराज के पावन सानिध्य में कश्मीर से कन्याकुमारी तक राष्ट्रवादी संकल्प यात्रा के तहत स्वर्वेद कथा का आयोजन किया गया ।
संतों का विहंगम योग शताब्दी समारोह महोत्सव 25000 कुण्डी स्वर्वेद ज्ञान महायज्ञ के निमित्त स्वर्वेद कथामृत के प्रणेता पूज्य संत प्रवर विज्ञानदेव जी महाराज के पावन सान्निध्य में कश्मीर से कन्याकुमारी तक राष्ट्र व्यापी 24 September सुबह 11 बजे संकल्प यात्रा जय स्वर्वेद कथा। हर्ष एवं उल्लास के साथ सन्देश में बताया कि विहंगम योग संत समाज के 100 वें वार्षिकोत्सव को इस वर्ष ” शताब्दी समारम्भ महोत्सव” के रूप में दिनांक 17 एवं 18 दिसम्बर 2023 (मार्गशीर्ष शुक्ल पञ्चमी पष्ठी) को स्वर्वेद महामन्दिर धाम, उमरहाँ, वाराणसी में बहुत ही भव्यता एवं दिव्यता के साथ मनाया जाएगा। इस पावन अवसर पर विशालतम 25000 कुण्डीय स्वर्वेद ज्ञान महायज्ञ का वृहद आयोजन किया जाएगा।इसी पावन तिथि पर विहंगम योग के प्रणेता अनन्त सद्गुरु सदाफलदेव जी महाराज ने वर्ष 1924 ई० में मानवमात्र के कल्याणार्थ बलिया (उत्तर प्रदेश) के पकड़ी ग्राम स्थित वृत्तिकूट आश्रम में लक्षाहुति-यज्ञ के साथ ब्रह्मविद्या विहंगम योग के प्रचार के निमित्त ‘संत समाज’ की स्थापना की थी। यह संत समाज के स्थापना दिवस का पावन पर्व है, जिसे हम वार्षिकोत्सव के रूप में मनाते चले आ रहे हैं।
भारत की सांस्कृतिक राजधानी वाराणसी में बन रहे विशालतम साधना केन्द्र, स्वर्वेद महामन्दिर धाम के.निर्माणार्थ, महामन्दिर के हो प्रांगण में आयोजित वृहद् “स्वर्वेद ज्ञान महायज्ञ” में सभी आमंत्रित है। 25,000हवन कुण्डों के इस वैदिक महायज्ञ में आहुति देने लाखों की संख्या में सेवाभावी श्रद्धालुगण पधार रहे हैं।सद्गुरुदेव ने अपने प्रत्यक्ष योग-समाधिजन्य अनुभवों को हिमालय की कन्दरा में अध्यात्म-जगत् के अद्वितीय सद्ग्रंथ ‘स्वर्वेद’ के रूप में लिपिबद्ध किया है। सरल दोहों के रूप में रचित ‘स्ववंद’ महाग्रंथ से हमें ब्रह्मविद्या के तत्त्वज्ञान और अनुभवात्मक साधना का सम्पूर्ण बोध होता है।
अशान्ति एवं वैमनस्य से पीड़ित विश्व में शांति एवं सौहार्द की स्थापना करने का सर्वश्रेष्ठ माध्यम है- स्वर्वेद महामन्दिर का हृदय हैं दुर्लभ मकराना संगमरमर पर उत्कीर्ण स्वर्वेद के समस्त दोहे, जो महामन्दिर की दीवारों पर सुशोभित हो इसे आध्यात्मिक ऊर्जा का एक जीवंत केन्द्र बना रहे हैं।
अतिसुन्दर शिल्पकला एवं आधुनिक तकनीक के सामंजस्य से बन रहे इस विशाल सप्ततलीय स्वर्वेद महामन्दिर में जब 20,000 साधक एक साथ बैठकर ध्यान करेंगे तो एक अद्भुत आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार होगा।नवापारा कलाम कोठी में आयोजित कार्यक्रम की तैयारी में संस्था के संभाग संयोजक अरविन्द सिंह, मदन किशोर सिंह,विजय सिंह,प्रमोद कुमार सिंह,रतनेश वरी सिंह,अनूठा यादव,राम प्रवेश तिवारी सहित अनेक गुरु भाई एवं अन्य भक्त गण कार्यक्रम को सफल बनाने में जुटे रहे l








