भारत रक्षा बंधन पर्व मनाने का परंपरा महाभारत काल से, रानी कर्णावती व सम्राट हुमायूं और देवराज इंद्र और इंद्राणी से भी है
जुड़ा है पर्व उक्त बातें आचार्य नीरज मिश्र ने बताया -भाई बहन का परम पुनीत पवित्र त्यौहार रक्षाबंधन का पर्व श्रावण की पूर्णिमा 31 अगस्त 2023 दिन बृहस्पतिवार को उदय व्यापनी पूर्णिमा में मनाया जाएगा।यह पर्व पूर्णिमा तिथि की शुरुआत 30 अगस्त को प्रातः 10 बजकर 59 मिनट से हो रही है और यह 31 अगस्त को प्रातः काल 7:05 तक रहेगी। उसके बाद भी दिन भर उत्तम मुहूर्त है।भाई बहन के पवित्र रिश्ते का यह त्योहार पूरे भारत में उत्साह के साथ मनाया जाता है ।बहने अपने भाई की लंबी उम्र की कामना करती है ।वहीं भाई भी बहन की रक्षा करने का संकल्प लेता है। धार्मिक ग्रंथो के मुताबिक रक्षाबंधन का पर्व भद्रा काल में नहीं मनना चाहिए।महाभारत काल में भगवान श्री कृष्ण ने एक राक्षस के वध के दौरान उनकी उंगली में चोट लगने से खून बहने लगा था ,यह देखकर द्रोपदी ने अपना आंचल का पल्लू फाड़ कर उनकी कटी उंगली में बांध दिया था उसी दिन से रक्षाबंधन या राखी बांधने की परंपरा का शुरुआत हुई थी।एक और मान्यता के अनुसार रानी कर्णावती व सम्राट हुमायूं से भी जुड़ा है रक्षाबंधन पर्व, एक और मान्यता के अनुसार देवराज इंद्र और राक्षस वृत्रासुर राक्षस से जुड़ा है यह पर्व।रक्षाबंधन पर्व मनाने को लेकर अरेराज अनुमण्डल क्षेत्र में तैयारियां जोर-जोर से है। बाजारों में राखी की दुकानें सज गई है










