एलएनडी काॅलेज में मैनेजर एंड मैनेजमेंट विषय पर व्याख्यान का सफल आयोजन

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मोतिहारी: जिले के एलएनडी काॅलेज में शनिवार को बीबीए विभाग के सौजन्य से *मैनेजर एंड मैनेजमेंट* विषय पर व्याख्यान का सफल आयोजन किया गया। मुख्य अतिथि-सह-केसरिया विधायिका शालिनी मिश्रा, प्राचार्य प्रो.(डॉ.) अरूण कुमार एवं बीबीए समन्वयक लेफ्टिनेंट दुर्गेशमणि तिवारी सहित सभी शिक्षकों ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलन करते हुए कार्यक्रम का शुभारंभ किया।

एक विद्यार्थी, एक नारी, एक गृहिणी, एक समाजसेविका व एक जनप्रतिनिधि के रूप में अपने प्रबंधन अनुभव को साझा कर मुख्य अतिथि शालिनी मिश्रा ने प्रबंधन के विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कही कि आत्मानुशासन किसी भी क्षेत्र के प्रबंधन में सफलता की पहली शर्त है। यह विश्व का एक बड़ा माध्यम है जिसके तहत व्यवसाय और उद्यमिता का कुशल संचालन होता है। लक्ष्य निर्धारित कर मजबूत आत्मविश्वास के साथ सतत् परिश्रम ही प्रबंधकों को मंजिल तक पहुंचा सकता है। लक्ष्य के बिना किसी भी संगठन के प्रबंधन में प्रबंधकों का कोई महत्व नहीं है। लक्ष्य नहीं होने पर हम संगठन के मैदान में इधर-उधर दौड़ते रहेंगे लेकिन एक गोल भी नहीं कर पाएंगे। सांगठनिक प्रबंधन में मिली असफलताएं भी फिर से नई शुरुआत करने का अवसर देती है दूसरे प्रयास में प्रबंधकों को वह गलतियां नहीं करनी चाहिए

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जिनकी वजह से पहला प्रयास असफल हुआ है। प्रबंधकों के चिंतन की स्पष्टता व टीम वर्क प्रबंधन को सफलता के शिखर पर ले जा सकता है। किसी भी प्रबंधन की प्रतिस्पर्धा से भी एक प्रतिस्पर्धी प्रबंधक प्रेरणा लेते हुए सीख सकता है। उन्होंने कम्युनिकेशन स्किल्स को समझाते हुए प्लान, प्रोसेस, पीपुल, पोसेशन और प्रॉफिट फाइव-पी को रेखांकित की। उन्होंने बहुद्देशीय कंपनी में प्रबंधकों की क्रियाशैली को ही उनके प्रमोशन का आधार बतायी। प्रबंधन को ग्राहकों के प्रबंधन व उत्पाद की गुणवत्ता पर सदा ध्यान देना चाहिए। हमारा असली मुकाबला किसी और से नहीं बल्कि खुद से है हम आज बीते हुए कल से बेहतर काम कर रहे हैं तो समझ लीजिए कि आने वाला कल और बेहतर होगा।

प्राचार्य प्रो.(डॉ.) अरूण कुमार ने विदुषी वक्ता व  राजनेत्री, मुख्य अतिथि-सह-केसरिया विधायिका शालिनी मिश्रा का बुके देकर स्वागत किया। उन्होंने अपने उद्बोधन में कहा कि किसी भी प्रबन्धन में ईबीसी का त्याग कर सफलता का परचम लहराया जा सकता है। ई का अभिप्राय एक्सक्यूज से, बी का अभिप्राय ब्लेम से और सी का अभिप्राय कंप्लेन से है अर्थात् किसी भी संगठन में इन तीन प्रवृतियों का त्याग करते हुए निर्धारित लक्ष्य को पा सकते हैं। हम नकारात्मक बातों से जितना ज्यादा दूर रहेंगे, उतने ही ज्यादा सफलता के करीब रहेंगे। नकारात्मकता के कारण छोटे-से-छोटे काम भी मुश्किल हो जाते हैं।

विशिष्ट वक्ता के रूप में बीसीए समन्वयक डॉ.पिनाकी लाहा ने विद्यार्थियों को डिजिटल मार्केटिंग के लाभों से से परिचित कराते हुए कहा कि विद्यार्थी डिजिटल मार्केटिंग के लर्निंग एवं अर्निंग मोड में पार्ट टाइम जॉब कर सकते हैं। उन्होंने कंटेंट राइटिंग, एडवर्टाइजमेंट मेकिंग, वीडियो एवं ऑडियो मेकिंग, बेब लिंक, सर्च इंजन जैसे अन्यान्य प्लेटफॉर्म का यूज कर विभिन्न क्षेत्रों में सीखते हुए अर्निंग कर सकते हैं। दर्शनशास्त्र विभागाध्यक्ष डॉ.राजेश कुमार सिन्हा ने मनुष्य के पूरे जीवन को ही प्रबंधन का अंग बताया। उनके अनुसार व्यक्तियों के प्रबंधन की प्रथम पाठशाला उसका परिवार ही होता है।

बीबीए समन्वयक लेफ्टिनेंट दुर्गेशमणि तिवारी ने सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए विषय प्रवर्तन कराकर प्रबंधन का गुर सीखाया। मंच का सफल संचालन कार्यक्रम संयोजक सत्यम कार्तिकेय वत्स तथा धन्यवाद ज्ञापन श्वेता जोशी ने किया। मीडिया प्रभारी डाॅ.कुमार राकेश रंजन ने बताया कि व्याख्यान के इस अनुपम मौके पर सहायकाचार्यों की ओर से डाॅ.जौवाद हुसैन, डॉ.सन्तोष विश्नोई, डॉ.रविरंजन सिंह, निखिल राज व श्वेता जोशी, शिक्षकेत्तर कर्मचारियों की ओर से प्रधान सहायक राजीव कुमार, राजन कुमार सिंह व मनीष कुमार सहित सभी लोग उपस्थित थे। कार्यक्रम को सफल बनाने में आरनी, श्रेया उपाध्यय, ख़ुशी, अंजलि, आदित्य राज, नमन, सबरे आलम व गुलशन की अहम् भूमिका रही।