आनंद मोहन की रिहाई पर भाजपा नेताओं की बंटी राय

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भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 302, 307 और 147 के तहत सजायफ्ता बाहुबली आनंद मोहन जेल से रिहा कर दिए गए हैं. यह सभी धाराएं गोपालगंज के तत्कालीन जिलाधिकारी जी कृष्णैया की हत्या के बाद मोहन पर लगाई गई थी. 2007 में निचली अदालत ने इस मामले में आनंद मोहन को फांसी की सजा सुनाई थी, जिसे बाद में पटना हाईकोर्ट ने आजीवन कारावास में बदल दिया था

आनंद मोहन के रिहा होने के बाद सीवान के बाहुबली नेता शहाबुद्दीन भी सुर्खियों में है. सोशल मीडिया पर यूजर्स नीतीश सरकार से शहाबुद्दीन को लेकर सवाल पूछ रहे हैं. इतना ही नहीं, यूजर्स आनंद मोहन को शहाबुद्दीन की तरह ही फिर से जेल भेजने की मांग कर रहे हैं.

आनंद मोहन के समर्थकों से नीतीश कुमार ने क्या कहा था- 

नीतीश कुमार ने क्या कहा था आपको तो पता ही है न कि हम कोशिश कर रहे हैं. उनकी पत्नी से पूछ लीजिएगा कि हम क्या कोशिश कर रहे हैं. अगर आपलोग इस तरह से चिल्लाएंगे तो लोग दूसरी चीज समझ लेंगे.

आनंद मोहन के साथ-साथ 27 लोगों को छोड़ा गया 

आनंद मोहन समेत जिन कैदियों को छोड़ा गया है, उनमें 8 यादव, 5 मुस्लिम, 4 राजपूत, 3 भूमिहार, 2 कोयरी, 01 कुर्मी, 01 गंगोता और 01 नोनिया जाति से आते हैं. बिहार के मुख्य सचिव आमिर सुहानी ने कहा कि सभी को नियमबद्ध तरीके से छोड़ा गया है.

इस सूची में 27 नाम हैं जिनमें 13 नाम MY समीकरण वाले हैं.

सरकार की सूची में बेऊर सेंट्रल जेल में बंद शिवजी यादव, लखीसराय जेल में बंद अशोक यादव, भागलपुर के विशेष केंद्रीय कारा में बंद किरथ यादव, बक्सर के ओपेन जेल में बंद राज बल्लभ यादव उर्फ बिजली यादव, पतिराम राय और किशुनदेव राय, वहीं बिहारशरीफ जेल में बंद खेलावन यादव के साथ-साथ भागलपुर के स्पेशल जेल में बंद मो. खुदबुद्दीन, अलाउद्दीन अंसारी, हलीम अंसारी, चन्देश्वरी यादव और अख्तर अंसारी अररिया जेल में बंद दस्तगीर खान का नाम शामिल है.

नीतीश सरकार ने किया यह बदलाव

दरअसल, राज्य सरकार ने 10 अप्रैल को बिहार कारा हस्तक, 2012 के नियम 481 (I) (क) में बदलाव किया था। इसके बाद आनंद मोहन की रिहाई का रास्ता साफ हो गया था। दरअसल, बिहार सरकार कारा हस्तक से उस क्लॉज को हटा दिया था जिसमें सरकारी कर्मचारी की हत्या करने के दोषी की सजा को माफ न करने का जिक्र था। बिहार सरकार ने कारा अधिनियम 1894 की धारा 59 एवं दंड प्रक्रिया संहिता 1973 (1974 का 2) की धारा 432 द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग किया था और इसमें संशोधन किया था।

आनंद मोहन की रिहाई पर भाजपा नेताओं की बंटी राय

आनंद मोहन की रिहाई को लेकर राज्य की मुख्य विपक्षी पार्टी भाजपा के नेताओं की राय बंटी हुई है। कुछ नेता इसका खुलकर विरोध कर रहे हैं तो कुछ समर्थन। राज्य की विधानसभा में भाजपा के नेता प्रतिपक्ष विजय सिन्हा ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि बिहार में गैर संवैधानिक काम हो रहा है। राज्य के पूर्व उपमुख्यमंत्री और राज्यसभा सांसद ने नीतीश सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि जिलाधिकारी की हत्या के दोषी को छोड़ना सरकार दलित विरोधी चेहरा है। वहीं, पूर्व मंत्री नीरज सिंह बबलू ने इस फैसले का स्वागत किया है। आज कुछ लोग भाजपा के नेता बिरोध कर रहे हैं उस समय उनकी सोच समझ कहा चली गई थी जब 2012 में किसी अपराधी को छोड़ने के लिए जब नियम बने तब बिहार कि सरकार भाजपा के साथ ही गठबंधन था l उस समय नियम नहीं बनने देना चाहिए था l नियम बना तो साथ थे और आज बिरोध कर जनता को गुमराह कर रही हैं

Republic7 भारत/ रजनीश रवि