एमजीसीयू के तृतीय दीक्षांत समारोह में उपराष्ट्रपति का संदेश — “राष्ट्र प्रथम की भावना से आगे बढ़ें युवा”

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मोतिहारी स्थित महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय (एमजीसीयू) के राजा बाजार परिसर में आयोजित तृतीय दीक्षांत समारोह शिक्षा, प्रेरणा और राष्ट्रीय चेतना का भव्य संगम बन गया। समारोह के मुख्य अतिथि भारत गणराज्य के माननीय उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने विद्यार्थियों को “राष्ट्र प्रथम” की भावना के साथ जीवन में आगे बढ़ने का प्रेरक संदेश दिया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के 9 मेधावी विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक प्रदान कर सम्मानित किया गया, जिससे पूरे परिसर में गौरव और उत्साह का वातावरण देखने को मिला।

कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथियों के रूप में बिहार के माननीय राज्यपाल सैयद अता हुस्नैन, उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, शिक्षा मंत्री सुनील कुमार, राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश, भारत सरकार के कोयला एवं खान मंत्रालय के राज्यमंत्री सतीश चंद्र दुबे तथा पूर्वी चंपारण के सांसद राधामोहन सिंह की गरिमामयी उपस्थिति रही। कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलाधिपति डॉ. महेश शर्मा ने की, जबकि कुलपति प्रो. संजय श्रीवास्तव ने स्वागत भाषण प्रस्तुत किया।

शैक्षणिक शोभायात्रा से हुआ कार्यक्रम का शुभारंभ

दीक्षांत समारोह की शुरुआत शैक्षणिक शोभायात्रा से हुई, जिसमें सशस्त्र सीमा बल की मधुर धुनों के बीच अतिथियों का पारंपरिक स्वागत किया गया। इसके पश्चात मां सरस्वती एवं राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की प्रतिमाओं पर माल्यार्पण तथा दीप प्रज्वलन कर कार्यक्रम का विधिवत उद्घाटन किया गया। समारोह का वातावरण पूरी तरह शैक्षणिक गरिमा, सांस्कृतिक परंपरा और राष्ट्रीय भावना से ओतप्रोत दिखाई दिया।

स्वागत भाषण में कुलपति प्रो. संजय श्रीवास्तव ने बिहार की गौरवशाली ज्ञान परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि यह वही धरती है जहां गौतम बुद्ध को ज्ञान की प्राप्ति हुई थी। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय नई शिक्षा नीति 2020 को पूरी प्रतिबद्धता के साथ लागू करते हुए वैश्विक मानकों के अनुरूप शिक्षा प्रदान कर रहा है।

उन्होंने यह भी कहा कि विश्वविद्यालय अस्थायी परिसर में संचालित होने के बावजूद छात्रों को आधुनिक और डिजिटल सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए निरंतर प्रयासरत है। विश्वविद्यालय की लाइब्रेरी पूर्णतः डिजिटल हो चुकी है तथा कई प्राध्यापक विश्व के शीर्ष 2 प्रतिशत वैज्ञानिकों में शामिल हैं। साथ ही विद्यार्थियों के लिए ऑनलाइन फीस भुगतान और डिजिटल अंकपत्र की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है।

9 मेधावी छात्रों को मिला स्वर्ण पदक

दीक्षांत समारोह का सबसे प्रेरणादायक क्षण वह रहा जब उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने 9 प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक प्रदान कर सम्मानित किया। स्वर्ण पदक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों में अदिति प्रग्या, मुस्कान कुमारी, बलिराम कुमार, आदित्य प्रसाद, रचित यशस्वी, सचिन कुमार, श्रुति कुमारी, अनानंक कुमार तथा चंदन कुमार शामिल रहे।

इन विद्यार्थियों की उपलब्धि ने न केवल विश्वविद्यालय बल्कि पूरे चंपारण क्षेत्र को गौरवान्वित किया। समारोह में उपस्थित छात्रों और अभिभावकों ने तालियों की गड़गड़ाहट से इन मेधावी विद्यार्थियों का स्वागत किया।

उपराष्ट्रपति ने युवाओं को दिया “राष्ट्र प्रथम” का संदेश 

मुख्य अतिथि के रूप में अपने संबोधन में उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने चंपारण की ऐतिहासिक और वैचारिक महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह महान विचारों की धरती है। उन्होंने कहा कि बौद्ध और जैन सहित अनेक सामाजिक विचारधाराओं की उत्पत्ति बिहार की भूमि से हुई है।

उन्होंने बताया कि मोहनदास करमचंद गांधी को “महात्मा” की उपाधि भी चंपारण की इसी धरती पर सत्य और ज्ञान की अनुभूति के कारण मिली थी। उन्होंने युवाओं से नवाचार की दिशा में कार्य करने तथा राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने का आह्वान किया।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत निरंतर प्रगति के पथ पर अग्रसर है और शीघ्र ही विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की ओर बढ़ रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि “विकसित भारत” अब केवल सपना नहीं बल्कि एक साकार होने वाली वास्तविकता है।

उपराष्ट्रपति ने युवाओं को निरंतर सीखने और बदलते परिवेश के अनुरूप स्वयं को ढालने की सलाह देते हुए कहा कि महिलाओं की भूमिका राष्ट्र निर्माण में अत्यंत महत्वपूर्ण है और उनके सशक्तिकरण से ही देश का समग्र विकास संभव है।

राज्यपाल ने विद्यार्थियों को दिए नैतिक मूल्यों के संदेश

बिहार के राज्यपाल सैयद अता हुस्नैन ने अपने संबोधन में कहा कि महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय बिहार की उच्च शिक्षा व्यवस्था की मजबूत नींव के रूप में स्थापित हो रहा है। उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन की सराहना करते हुए कहा कि नई शिक्षा नीति 2020 का प्रभावी क्रियान्वयन यहां देखने को मिल रहा है।

उन्होंने विद्यार्थियों से आग्रह किया कि वे व्यक्तिगत सफलता के साथ-साथ राष्ट्रहित और मानवता के कल्याण को भी अपने जीवन का लक्ष्य बनाएं। उन्होंने कहा कि आज के विद्यार्थी जिज्ञासु और रचनात्मक सोच के साथ आगे बढ़ रहे हैं, जो देश के उज्ज्वल भविष्य का संकेत है।

उपमुख्यमंत्री ने विकास योजनाओं का किया उल्लेख 

उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने अपने संबोधन में कहा कि चंपारण आंदोलनों और ज्ञान की भूमि है, जिसने मोहनदास को महात्मा गांधी बनाया। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार के प्रयासों से नालंदा विश्वविद्यालय का पुनर्जीवन संभव हुआ है और अब विक्रमशिला विश्वविद्यालय के पुनरुद्धार की दिशा में भी प्रयास किए जा रहे हैं।

उन्होंने यह भी घोषणा की कि मोतिहारी में शीघ्र ही हवाई पट्टी का निर्माण कराया जाएगा, जिससे क्षेत्र के विकास को नई गति मिलेगी और पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा।

अन्य अतिथियों ने भी साझा किए प्रेरक विचार

राज्यमंत्री सतीश चंद्र दुबे ने कहा कि यह दीक्षांत समारोह विश्वविद्यालय की बढ़ती प्रतिष्ठा का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति के माध्यम से विद्यार्थियों का समग्र विकास सुनिश्चित किया जा रहा है और तकनीकी शिक्षा पर विशेष जोर दिया जा रहा है।

राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश ने विद्यार्थियों को मातृ ऋण, पितृ ऋण और राष्ट्र ऋण की याद दिलाते हुए कहा कि इनका निर्वहन करना प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है। उन्होंने युवाओं से सत्य के मार्ग पर चलने का संदेश देते हुए कहा कि आज भारत स्टार्टअप के क्षेत्र में विश्व में अग्रणी बन रहा है।

शिक्षा मंत्री सुनील कुमार ने विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए कहा कि आज के युवा बड़े सपने देख रहे हैं और उन्हें साकार भी कर रहे हैं। उन्होंने डिजिटल युग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की चुनौतियों का उल्लेख करते हुए विद्यार्थियों से निरंतर सीखते रहने की अपील की।

सांसद राधामोहन सिंह ने विश्वविद्यालय की प्रगति की सराहना करते हुए कहा कि यहां मशीन लर्निंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे आधुनिक विषयों पर नियमित रूप से सेमिनार आयोजित किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि पटना और मोतिहारी को जोड़ने वाले एक्सप्रेसवे का निर्माण कार्य प्रगति पर है, जिससे क्षेत्र के विकास को नई दिशा मिलेगी।

शिक्षा, प्रेरणा और राष्ट्रनिर्माण का संदेश देकर संपन्न हुआ समारोह 

समारोह के अंत में कुलपति प्रो. संजय श्रीवास्तव ने सभी अतिथियों के प्रति आभार व्यक्त किया और विद्यार्थियों को संदेश दिया कि उपाधि प्राप्त करना शिक्षा की समाप्ति नहीं बल्कि वास्तविक जीवन की शुरुआत है।

तृतीय दीक्षांत समारोह ने एक बार फिर यह सिद्ध कर दिया कि महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय न केवल शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्टता की ओर अग्रसर है, बल्कि राष्ट्र निर्माण के लिए प्रतिबद्ध जागरूक और सक्षम युवाओं का निर्माण भी कर रहा है। यह आयोजन विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा, संकल्प और नई दिशा का प्रतीक बनकर लंबे समय तक याद रखा जाएगा।